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TMBSP : तमिलनाडु में BSP से अलग एक राजनीतिक दल

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चेन्नई प्रवास के दौरान मुझे एक ऐसा तथ्य मिला, जिसने मेरी जिज्ञासा बढ़ा दी। मैं केवल पर्यटन स्थलों को देखने वाला यात्री नहीं हूँ; एक साहित्यकार और चिंतक होने के नाते मेरी दृष्टि समाज, संस्कृति और राजनीति के उन संकेतों पर भी रहती है, जो सामान्यतः लोगों का ध्यान आकर्षित नहीं करते। TMBSP : तमिलनाडु में एक राजनीतिक दल का बैनर चेन्नई सेंट्रल स्थित नेहरू स्टेडियम के आसपास भ्रमण करते समय मेरी दृष्टि कुछ भित्तिचित्रों और राजनीतिक दीवार-लेखन पर पड़ी। मैंने उनके छायाचित्र लिए। पहली नज़र में लगा कि यह बहुजन समाज पार्टी (BSP) का प्रचार है, क्योंकि वहाँ डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के चित्र स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। किंतु कुछ बातें ऐसी थीं, जिन्होंने मुझे रुककर सोचने के लिए विवश कर दिया। सबसे पहले मेरी दृष्टि TMBSP शब्द पर गई। उसके साथ हाथी का झंडा भी बना था, परंतु वह BSP के आधिकारिक चुनाव-चिह्न से भिन्न प्रतीत हुआ। इसके बाद मैंने पूरे भित्तिचित्र का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया। वहाँ डॉ. आंबेडकर के साथ एक पुरुष और एक महिला के चित्र थे, किंतु कु. मायावती का चित्र कहीं दिखाई नहीं दिया। ...

Gen Z : फैशन नहीं, समाजशास्त्र की अवधारणा

आजकल सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड चल पड़ा है—"मैं भी Gen Z हूँ।" यह वाक्य अक्सर 35–40 वर्ष के लोग भी गर्व से लिखते दिखाई देते हैं। कारण स्पष्ट है। Gen Z को आधुनिक, डिजिटल, ट्रेंडी और सोशल मीडिया की पीढ़ी माना जाता है। इसलिए बहुत से लोग स्वयं को भी उसी श्रेणी में दिखाना चाहते हैं।   लेकिन एक प्रश्न है— क्या कोई व्यक्ति केवल Instagram चलाने, Reels बनाने या Gen Z की भाषा बोलने से Gen Z बन जाता है?   उत्तर है—नहीं।    Gen Z कोई मानसिकता नहीं है   सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि Generation (पीढ़ी) और Mentality (मानसिकता) दो अलग बातें हैं।  • आप आधुनिक सोच रख सकते हैं।  • आप तकनीक के जानकार हो सकते हैं।  • आप AI का उपयोग कर सकते हैं।  • आप दिनभर सोशल मीडिया पर सक्रिय रह सकते हैं।  लेकिन इससे आपकी जन्म-पीढ़ी नहीं बदल जाती। जैसे कोई व्यक्ति क्रिकेट खेलकर सचिन तेंदुलकर की पीढ़ी का नहीं हो जाता, वैसे ही Gen Z की आदतें अपनाने से कोई Gen Z नहीं बन जाता।  Gen Z की उम्र सीमा क्या है?   समाजशास्त्र में विभिन्न संस्थानों द्वा...

धर्मेंद्र प्रधान : विद्यार्थी राजनीति से केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक

धर्मेंद्र प्रधान (जन्म : 26 जून 1969) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं। वे ओडिशा के अंगुल जिले के तालचेर के निवासी हैं। विद्यार्थी राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य तथा भारत सरकार में विभिन्न मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्री रहे हैं। जुलाई 2021 से जुलाई 2026 तक उन्होंने भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। प्रारंभिक जीवन एवं राजनीतिक शुरुआत धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। उनके पिता डॉ. देबेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। विद्यार्थी जीवन में धर्मेंद्र प्रधान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। बाद में उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा तथा भारतीय जनता पार्टी के संगठन में विभिन्न दायित्व निभाए। विधायक से संसद तक वर्ष 2000 में धर्मेंद्र प्रधान पहली बार ओडिशा विधानसभा के पल्ललहारा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2004 में वे ओडिशा के देवगढ़ लोकसभा...

'कॉकरोच आंदोलन' : दिशाहीन आंदोलन का दुष्परिणाम : एक वैचारिक समीक्षा

लोकतंत्र में आंदोलन जनता की आवाज़ होते हैं। इतिहास साक्षी है कि अनेक जनआंदोलनों ने समाज और शासन दोनों को नई दिशा दी है। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि हर आंदोलन स्वतः न्यायपूर्ण, दूरदर्शी या सफल नहीं होता। यदि किसी आंदोलन में स्पष्ट उद्देश्य, सही नेतृत्व, संस्थागत समझ और संवैधानिक रणनीति का अभाव हो, तो वह समाज को समाधान देने के बजाय भ्रम, विभाजन और निराशा की ओर भी ले जा सकता है। इसी संदर्भ में मैं जिस आंदोलन को "कॉकरोच आंदोलन" कह रहा हूँ, उसकी समीक्षा आवश्यक समझता हूँ। यह नाम मेरी आलोचनात्मक अभिव्यक्ति है; मेरा उद्देश्य किसी छात्र या नागरिक का अपमान करना नहीं, बल्कि आंदोलन की दिशा और कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाना है। आंदोलन की पहली कसौटी : क्या समस्या की सही पहचान हुई? किसी भी आंदोलन की सफलता का पहला आधार यह है कि वह समस्या की सही पहचान करे और सही संस्था से जवाबदेही माँगे। यदि किसी परीक्षा में अनियमितता होती है, तो यह देखना आवश्यक है कि परीक्षा का आयोजन किस संस्था ने किया, निर्णय किस स्तर पर हुए और प्रशासनिक उत्तरदायित्व किसका है। यदि आंदोलन अपनी पहली माँग ही उस व्यक्ति या संस...