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स्वाधीनता आंदोलन और खड़ी बोली हिंदी का साहित्य (शोध-पत्र)

स्वाधीनता आंदोलन और खड़ी बोली हिंदी का साहित्य - शोध-पत्र  (शोध-पत्र) स्वाधीनता आंदोलन और खड़ी बोली हिंदी का साहित्य लेखक - देवचंद्र भारती 'प्रखर' शोध सारांश  पराधीन भारत में ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाने के लिए भारतीय साहित्यकारों ने स्वाधीनता आंदोलन में अपना साहित्यिक योगदान दिया । साहित्यकारों ने खड़ी बोली हिंदी में साहित्य-सृजन करके भारतीय जनता में जागृति और स्वदेश प्रेम का भाव उत्पन्न किया । कविता, कहानी, नाटक तथा उपन्यास आदि विधाओं के माध्यम से हिंदी साहित्यकारों ने स्वाधीनता आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । अनेक साहित्यकारों ने साहित्य सृजन के अतिरिक्त स्वयं स्वाधीनता आंदोलन में प्रतिभाग भी किया तथा वे अंग्रेजी प्रशासन द्वारा बंदी भी बनाये गये, किंतु उन्होंने अपनी क्रांति की राह नहीं छोड़ी । हिंदी साहित्यकारों द्वारा निरंतर साहित्यिक प्रयास के कारण भारत के जवानों ने अंग्रेजी शासन का कड़ा विरोध किया तथा अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया ।  बीज शब्द  स्वाधीनता, खड़ी बोली, हिंदी साहित्य, राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संघर्ष, सांस्कृति...