तिरंगे की मर्यादा (संभाषण)
प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत गीत, नृत्य, संगीत, नाटक आदि के अतिरिक्त संभाषणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । विद्यालयों में संभाषण की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखकर संभाषण-संग्रह की पुस्तक 'देशप्रेम' की रचना की गयी है । इस पुस्तक के लेखक प्रख्यात साहित्यकार एवं समालोचक देवचंद्र भारती 'प्रखर' हैं । प्रस्तुत है इस पुस्तक से एक संभाषण । तिरंगे की मर्यादा Tirange Ki Maryada जिस समय भारतवर्ष पराधीन था, उस समय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को खुलेआम फहराने का अधिकार नहीं था । तिरंगे की मर्यादा को बनाए रखने के लिए कितने ही वीर शहीद हो गए । जब किसी ने तिरंगे पर थूका, उसका मुंह फोड़ दिए । जब किसी ने तिरंगे को पैरों से रौंदा, उसका पैर तोड़ दिए । यहां तक कि तिरंगे को जमीन पर गिरने से बचाने के लिए कितने ही वीर हंसते-हंसते बारूद में जल गए । गोलियों से सीना छलनी हो गया मगर तिरंगे को झुकने नहीं दिए । तिरंगा है निशान वीरों के जुनून का जिनको नसीब हो सका न पल सुकून का इस तिरंगे के रंगों पर अमल करो प्रखर तिरंगे में स...