मैं क्यों लिखता हूँ? — एक आंबेडकरवादी लेखक का वैचारिक वक्तव्य
मैं लिखता हूँ, क्योंकि चुप्पी अन्याय को मजबूत करती है।
मैं लिखता हूँ, क्योंकि समाज में व्याप्त असमानता, जातिगत शोषण और बौद्धिक पाखंड केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि वैचारिक हस्तक्षेप से चुनौती दिए जा सकते हैं।
मेरे लिए लेखन आत्मप्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा ने मुझे यह सिखाया कि साहित्य का उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि चेतना निर्माण होना चाहिए। इसलिए मेरा लेखन सामाजिक न्याय, संविधान आधारित लोकतंत्र, समानता और मानवीय गरिमा के पक्ष में खड़ा होता है।
आज के समय में विचारों को जानबूझकर भ्रमित किया जा रहा है। इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है और बहुजन समाज की चेतना को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसे समय में लेखक का दायित्व और बढ़ जाता है। मैं अपने लेखन के माध्यम से इस वैचारिक भ्रम के विरुद्ध तर्क, तथ्य और वैज्ञानिक दृष्टि प्रस्तुत करना चाहता हूँ।
यह ब्लॉग केवल मेरी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति नहीं है। यह उन सभी लोगों के लिए है जो सोचते हैं, सवाल करते हैं और एक न्यायपूर्ण समाज की कल्पना करते हैं। मेरा उद्देश्य लोकप्रियता नहीं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता है। यदि मेरे शब्द किसी एक व्यक्ति को भी सोचने पर मजबूर करते हैं, तो मेरा लेखन सफल है।
यह लेखन यात्रा जारी है। यह संघर्ष है। यह संकल्प है।
✍ लेखक हस्ताक्षर
— देवचंद्र भारती प्रखर
आंबेडकरवादी लेखक एवं चिंतक
https://devachandrabharatiprakhar.blogspot.com
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